Sunday, August 02, 2009

भरे जहन में ज़हर जो कभी



भरे
जहन में जब ज़हर जो कभी
फूल से लगने वाले भी कांटे बन जाते हैं
ज़िन्दगी में यारों ऐसे भी मुकाम आते हैं

उम्रभर संभाल रखे यादों के गुलदस्ते
एक पल में गिरके तमाम हो जाते हैं
ज़िन्दगी में यारों ऐसे भी मुकाम आते हैं

पड़ती है दिल--दिमाग पर ठोकर कुछ इस कदर
भीड़ में वीराने, वीरानो में शोर के मंज़र हो जाते हैं
ज़िन्दगी में यारों ऐसे भी मुकाम आते हैं

यह भी मैंने देख लिया नजदीकियों का हश्र
समझने से पहले नजदीकियों में फांसले जाते हैं
ज़िन्दगी में यारों ऐसे भी मुकाम आते हैं

चलते हैं अचानक ही जब इल्ज़ामात के अंधड़
कुछ पल में ही 'आप' 'तू' में बदल जाते हैं
ज़िन्दगी में यारों ऐसे भी मुकाम आते हैं


3 comments:

pranjuli said...

Ultimate.....maja aa gaya....

BLUEGUITAR said...

:)

Thanks Sis :)

LEVID said...

u have to write in roman for me to understand :)